Tuesday, 27 December 2016

चाँद आया उतर अब गगन में पिया

हाल दिल का सजन अब कहें  कम से कम

बात  दिल  की  न दिल में रहे कम से कम 

चाँद आया उतर अब गगन में पिया

चांदनी रात में हम मिलें  कम से कम

रेखा जोशी

है शाश्वत सत्य यही

परिवर्तनशील
इस जग में
नही कुछ भी यहां स्थिर
पिघल जाता 
है लोहा भी इक दिन
चूर चूर हो जाता 
पर्वत भी
बहा ले जाता 
समय संग अपने
सब कुछ
नहीं टिक पाता
समय के आगे
कुछ भी 
रह जाती  बस 
माटी ही माटी 
है शाश्वत  सत्य यही
समाया इक तू ही 
सृष्टि के कण कण में
छू नही
सकता जिसे 
समय  भी कभी

रेखा जोशी

Monday, 26 December 2016

मिली सिर्फ उनसे हमको है बेवफाई


जिनके लिए हमने दिल औ जान लुटाई .

मिली  सिर्फ  उनसे हमको है  बेवफाई |

...............................................

सजदा किया उसका निकला वो हरजाई ,

मुहब्बत के बदले पायी  हमने रुसवाई |

...............................................

धडकता है दिले नादां सुनते ही शहनाई,

पर तक़दीर से हमने तो  मात  ही खाई |

................................................

न भर नयन तू आग तो दिल ने है लगाई ,

धोखा औ फरेब फितरत में, दुहाई है दुहाई,|

................................................

छोड़ गए क्यूँ तन्हां दे कर लम्बी जुदाई,

जी लेंगे बिन तेरे ,काट लेंगे सूनी तन्हाई |

रेखा जोशी

Sunday, 25 December 2016

चले आओ तुम यहां

सातवें आसमान से
है आवाज़ आई
चले आओ तुम यहां
बना लो आशियाँ

ख़ुशी की लहर पे
होकर सवार
है चलती कश्तियाँ
मुस्कुराती हर शह यहां
नाचती  तितलियाँ
बिखेर कर रंग अपने
हर्षाती ह्रदय को
लुभाते झरने
झर झर बहते पर्वतों की
श्रंखलाओं से नीचे
मधुर तान छेड़ कर
संगीत अलौकिक  ने
घोल दिया कानो में
अनुपम स्वर
चले आओ तुम यहां
बना लो आशियाँ

टिमटिमाते सितारे
उतर आये ज़मीं पे
जगमगाने लगा
आँचल भी धरा का
मुस्कुराती वसुधा ने
हर लिये सभी गम
चले आओ तुम यहाँ
बना लो आशियाँ

सुघन्दित पुष्पों से भरी
पुकारे वादियां
चले आओ तुम यहां
बना लो आशियाँ

रेखा जोशी

Tuesday, 20 December 2016

मुक्तक

मुखर

मिलजुल कर रहे सदा आपस  में प्यार लिखें
मुखर हो कर हम सब प्यार का इज़हार  लिखें
प्रेम से हर पल बीते हर  लें पीर सबकी
सँवार लें  ज़िंदगी ख़ुशी भरा सँसार लिखें
,,
मौन
हे प्रभु सर पे मेरे सदा तेरा हाथ रहे
हर मुश्किल में  हमें मिलता तेरा साथ रहे
हूँ मौन फिर भी सुन लेते तुम पुकार मेरी
भरे  सभी की झोली कृपा तेरी नाथ रहे

रेखा जोशी

Friday, 16 December 2016

सफर नीर का पर्वत से सागर तक

क्षणिका 

सफर नीर का
पर्वत से सागर तक
या फिर
सागर से पर्वत तक
चलता जा रहा
निरंतर
रुकता नही
ज़िंदगी भी रूकती नही
जीवन मृत्यु 
है एक सिक्के के 
दो पहलु 
है आज गर जीवन 
कल मृत्यु 
लेकिन 
मृत्यु के बाद भी
है जीवन 
बदलता
केवल स्वरूप
उसका

रेखा जोशी

रिमझिम रिमझिम बरस रही काली घटायें


झूला  झूलती  सखियाँ  लो  आया सावन 
बरसात  लाई  खुशियाँ  लो  आया सावन 
रिमझिम रिमझिम बरस रही काली घटायें 
धड़काये   मेरा  जिया   लो  आया  सावन 

रेखा जोशी 

करेंगे याद तुमको हम उमर भर

हमारी ज़िंदगी हमसे खफा है
ज़माना ज़िन्दगी पीछे पड़ा है
,,
नही चाहा कभी हम दूर जायें
करें क्या प्यार लेता इम्तिहाँ है
,,,
न आयें हम यहाँ पर लौट कर फिर
नही तुम भूलना हमको पिया है
,,,
करेंगे याद तुमको हम उमर भर
करेंगे फिर नही तुमसे गिला है
,,,
गई है उजड़ अब दुनिया हमारी
कोई न आहट न कोई बोलता है
रेखा जोशी

Thursday, 15 December 2016

जानी कभी न तुमने रीत प्रीत की पिया

रोती   रही   हसरते   टूट  गये   अरमान
अहम  में  डूबे  तुम  करते  रहे अपमान
जानी कभी न तुमने  रीत प्रीत की पिया
लो आज  सजन हम दूर  ले चले सामान

रेखा जोशी



Sunday, 4 December 2016

नारायण नारायण

नारायण नारायण

”नारायण नारायण ”बोलते हुए नारद मुनि जी अपने प्रभु श्री हरि को खोजते खोजते पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगा कर भू लोक में आ विराजे ,लेकिन उन्हें श्री हरि कहीं भी दिखाई नही दिए ,”पता नहीं प्रभु कहाँ चले गए ,अंतर्ध्यान हो के कहाँ गायब हो गए मेरे प्रभु ”यह सोच सोच कर बेचारे नारद मुनि जी परेशान हो रहे थे |

उन्होंने श्री हरि को इस धरती के कोने कोने में जा करके कहाँ कहाँ नही ढूंढा,.हिमालय पर्वत की बर्फीली गुफाओं में ,कंदराओं में ,सारी दुनिया के विभिन्न विभिन्न मंदिरों में ,कभी वह देवी माँ के मंदिरों में खोजते तो कभी स्वयंभू की शरण में जाते ,कभी श्री राम के मंदिर में खोजते तो कभी संकटमोचन हनुमान जी के दर पर पहुंच जाते ,दर ब दर भटकते हुए मक्का मदीना भी घूम आये ,उनकी तलाश में वह दुनिया भर की मस्जिदों में भी अपनी हाजरी लगा कर आगये ,लेकिन श्री हरिके दरस उन्हें कहीं पर नहीं हुए ,सोचने लगे,” क्यों न मै उन्हें गिरिजाघर में भी जा कर देख लूँ उस परमात्मा ने ही तो यह सृष्टि बनाई है ,क्या पता वह गिरिजाघर में ही विश्राम कर रहें हो ,”जल्दी से नारद मुनि जी विभिन्न विभिन्न गिरिजाघरों में भी उन्हें तलाश कर के वापिस उसी स्थान पर आ गए ,इतना घूम घूम कर बेचारे थक गए लेकिन उन्हें श्री हरि को पाने लग्न उन्हें विश्राम करने नही दे रही थी ,बहुत ही चिंतित हो रहे थे वह उनके लिए ,चलते चलते उन्हें एक पेड़ दिखाई दिया ,वहां पर अपनी थकान मिटाने के लिए वह उसके नीचे बैठ गए ,पास में ही एक गुरुदुवारा था जहां से लाउडस्पीकर से आवाज़ आ रही थी ,”एक नूर से सब जग उपजया,कौन भले कौन मंदे |” 

लाउडस्पीकर की आवाज़ सुनते ही नारद मुनि जी वहां से उठे ओर उनके पाँव गुरुदुवारे की ओर चल पड़े यह सोचते हुए कि गुरुदुवारे के अंदर भी तो उसी परमात्मा के बन्दे बैठे हुए है शायद प्रभु उनका हालचाल पूछने वहां चले गयें हो |भीतर जा कर देखा सभी भक्त उस प्रभु का नाम ले रहे है ,ऐसा ही कुछ उन्होंने उन सभी धर्मस्थलों पर देखा था ,पूरी धरती पर सम्पूर्ण मानव जन उसी ईश्वर को याद कर रहे थे लेकिन अलग अलग नामो से |” 

नारायण नारायण ,वाह प्रभु यह कैसी माया ,आप तो सभी धर्मस्थलों से नदारद और पूरी दुनिया बस आप का ही जप कर रही है ,”नारद मुनि जी के मुख से यह शब्द अन्नान्यास ही निकल पड़े |अपने प्रभु को कहीं भी न पा कर हताश हो कर नारद मुनि जी वापिस उसी पेड़ के नीचे आ कर बैठ गए,थकावट के मारे उनका अंग अंग दर्द करने लगा था इसलिए वह अपनी आँखें मूंद कर उसी पेड़ के नीचे लेट कर सुस्ताने लगे ,लेकिन उनके मन में हरि से मिलने की प्रबल इच्छा उन्हें आराम नही करने दे रही थी | 

तभी कुछ शोर सुन कर उन्होंने आँखे खोली तो देखा सामने एक छोटा बच्चा उनकी नींद में विघ्न डाल रहा था ,वह छोटा सा बच्चा नारद मुनि जी को देख उन्हें अपना मुहं बना बना कर चिढ़ाने लगा,उस नन्हे से बालक पर मुनि को क्रोध आ गया और वह उसे मारने को दौड़े और वह बालक खिलखिला के हंसने लगा ,”अरे यह क्या हुआ ,यह प्यारी हंसी तो मेरे प्रभु की है ,”उन्होंने आस पास सब जगह अपनी नजर दौडाई ,हतप्रभ रह गए नारद मुनि ,उन्हें तो हर ओर श्री हरि ही दिखाई दे रहे थे ,घबरा कर उन्होंने आँखे बंद कर ली,आत्मविभोर हो उठे नारद मुनि जी ,बंद आँखों से उन्होंने अपने भीतर ही प्रभु श्री हरि के साक्षात दर्शन कर लिए थे ,प्रभु को देखते ही नतमस्तक हो गए नारद मुनि जी और परम आनंद में झूमते हुए बोल उठे ,”नारायण नारायण |”

रेखा जोशी 

Thursday, 1 December 2016

अब हमारा यह ज़माना हो गया

आज फिर मौसम सुहाना  हो  गया 
प्यार में दिल यह दिवाना  हो गया
...
रूठ  कर हमसे  न जाना तुम कहीं 
प्यार  में घर का बसाना हो गया 
.... 
मिल गई हमको ख़ुशी आये पिया 
ज़िंदगी  का  मुस्कुराना  हो गया 
.... 
तुम हमें जो मिल गये दुनिया मिली 
घर हमारे का ठिकाना हो गया 
.... 
चाह अब हम को नहीं है किसी की 
अब हमारा यह ज़माना हो  गया 

रेखा जोशी 

Monday, 28 November 2016

तारों की छाया मेँ मिल के ,आ दूर कहीं अब चल दें हम

प्रदत्त छंद - पदपादाकुलक चौपाई (राधेश्यामी)


जब चाँद छुपा है बादल मेँ, तब रात यहॉं खिल जाती है
घूँघट ओढ़ा है अम्बर मेँ, चाँदनी यहाँ शर्माती है
तारों की छाया मेँ मिल के ,आ दूर कहीं अब चल दें हम
हाथों में हाथ लिये साजन,ज़िन्दगी बहुत अब भाती है
रेखा जोशी

जीवन भर का यह रिश्ता निभायें हम तुम

धरती  अम्बर  पर  उड़ते  साथी हम  तुम 
मिल जुल कर  बाते करते साथी  हम तुम 
गाना   गा   इक  दूजे  का   दिल  बहलाते 
है   पंछी   इक   दूजे  के  साथी  हम  तुम
....
नील  नभ में भरते  उडारी सँग  हम तुम 
ठंडी  हवा  के सँग  सँग  खेलते  हम तुम 
आओ    नाचें   गायें  अब    धूम  मचायें 
जीवन भर का यह रिश्ता निभायें हम तुम 
रेखा जोशी 

Sunday, 27 November 2016

मुस्कुराते अधर बाँवरे मेरे नयन

सुहानी चाँदनी  से भीगता यह बदन
हसीन ख्वाबों के पँखों  तले मेरा मन
सँग  लिये कई  रँग उड़ने लगी चाहतें
मुस्कुराते   अधर   बाँवरे  मेरे  नयन 

रेखा जोशी 

मन ही देवता मन ही ईश्वर[पूर्व प्रकाशित रचना ]

मन ही देवता मन ही ईश्वर

मन ,जी हाँ मन ,एक स्थान पर टिकता ही नही पल में यहाँ तो अगले ही पल न जाने कितनी दूर पहुंच जाता है ,हर वक्त भिन्न भिन्न विचारों की उथल पुथल में उलझा रहता है ,भटकता रहता है यहाँ से वहाँ और न जाने कहाँ कहाँ ,यह विचार ही तो है जो पहले मनुष्य के मन में उठते है फिर उसे ले जाते है कर्मक्षेत्र की ओर । जो भी मानव सोचता है उसके अनुरूप ही कर्म करता है ,तभी तो कहते है अपनी सोच सदा सकारात्मक रखो ,जी हां ,हमें मन में उठ रहे अपने विचारों को देखना आना चाहिए ,कौन से विचार मन में आ रहे है और हमे वह किस दिशा की ओर ले जा रहे है ,कहते है मन जीते जग जीत ,मन के हारे हार ,यह मन ही तो है जो आपको ज़िंदगी में सफल और असफल बनाता है ।

ज़िंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है ,हर किसी की ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है लेकिन जब परेशानियों से इंसान घिर जाता है तब कई बार वह हिम्मत हार जाता है ,उसके मन का विशवास डगमगा जाता है और घबरा कर वह सहारा ढूँढने लगता है ,ऐसा ही कुछ हुआ था सुमित के साथ जब अपने व्यापार में ईमानदारी की राह पर चलने से उसे मुहं की खानी पड़ी ,ज़िंदगी में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने की जगह वह नीचे लुढ़कने लगा ,व्यापार में उसका सारा रुपया डूब गया ,ऐसी स्थिति में उसकी बुद्धि ने भी सोचना छोड़ दिया ,वह भूल गया कि कोई उसका फायदा भी उठा सकता ,खुद पर विश्वास न करते हुए ज्योतिषों और तांत्रिकों के जाल में फंस गया ।

जब किसी का मन कमज़ोर होता है वह तभी सहारा तलाशता है ,वह अपने मन की शक्ति को नही पहचान पाता और भटक जाता है अंधविश्वास की गलियों में । ऐसा भी देखा गया है जब हम कोई अंगूठी पहनते है याँ ईश्वर की प्रार्थना ,पूजा अर्चना करते है तब ऐसा लगता है जैसे हमारे ऊपर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है लेकिन यह हमारे अपने मन का ही विश्वास होता है । मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा न कोई ,अगर मन में हो विश्वास तब हम कठिन से कठिन चुनौती का भी सामना कर सकते है |
रेखा जोशी 

Saturday, 26 November 2016

न मिलने का बहाना और ही था

1222 1222 122

तिरा साजन  फ़साना और ही था 
न मिलने का बहाना और ही था 
.. 
चले तुम छोड़ कर महफ़िल हमारी 
कभी  फिर रूठ जाना और ही था 
... 
रही हसरत अधूरी प्यार में अब 
वफ़ा हम को दिखाना और ही था 
.... 
शमा जलती रही है रात भर अब
मिला जो वह दिवाना और ही था 
... 
न बदला रूप अपना ज़िन्दगी ने  
जिया  दिल से  ज़माना  और ही था 

रेखा जोशी 

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
1222 1222 122
 काफिया आना
रदीफ़ और ही था

तिरा साजन  फ़साना और ही था
न मिलने का बहाना और ही था
..
न जाना छोड़ कर महफ़िल हमारी
तिरा फिर रूठ जाना और ही था
...
रही हसरत अधूरी प्यार में अब
वफ़ा हमसे निभाना और ही था
....
शमा जलती नही है रात भर अब
हमारा वह  ज़माना और ही था
...
बदल कर रूप अपना ज़िन्दगी अब
हमारे  पास  आना  और ही था

रेखा जोशी

Tuesday, 22 November 2016

प्रेम कर ले ज़िन्दगी वरदान है



प्रेम करले ज़िंदगी वरदान  है 
प्रीत सबसे जो करें इंसान है 
..... 
ज़िंदगी में सुख  मिले दुख भी मिले 
नाम प्रभु का जो जपे वह ज्ञान है 
..... 
दीन दुखियों की यहाँ सेवा  करें 
जान वह   प्रभु की यहाँ संतान है 
....... 
ज़िंदगी की डोर उसके हाथ में 
वह निभाता साथ हम  अंजान है 
.......  
हाथ जोडे हम करें वंदन यहाँ 
मुश्किलें जो  समझता भगवान है 

रेखा जोशी 




Friday, 18 November 2016

दर्द ऐ दिल के सिवा कुछ न मिला हमें

खूब  दिया  तुमने  प्यार  का सिला हमें
नहीं  तुमसे  कोई  भी  अब  गिला  हमें 
चैन  न  मिला  साजन  खाते   रहे चोट 
दर्द ऐ दिल के सिवा  कुछ न मिला हमें

रेखा जोशी 

Thursday, 17 November 2016

बनी अब राख पत्थर का किला है



खिली कलियाँ यहाँ उपवन खिला है
जहाँ में प्यार साजन  अब मिला है
... 
मिला जो प्यार में अब साथ तेरा
नहीं  अब  प्यार  से कोई  गिला है
..
दिखायें दर्द अपना अब किसे हम
हमारे दर्द का यह सिलसिला है
..
रहो पास' हमारे रात  दिन तुम
ज़मीं के संग  अम्बर  भी हिला है
....
लगा दी  आग सीने में हमारे
बनी अब  राख  पत्थर का किला है

रेखा जोशी 

तुम मेरे पास रहो

थे कर रहे इंतज़ार
तुम्हारा
न जाने कब से
आये हो मुद्दतों के बाद
तो आओ बैठों
कुछ अपनी कहो
कुछ मेरी सुनो
तड़पते रहे
बिन तुम्हारे हम
है चाहत यही
बंध जाएँ हम दोनों
प्रेम की डोर से
सदा सदा के लिए
और
जीवन भर के लिए
मै तेरे पास रहूँ
और
तुम मेरे पास रहो
.
रेखा जोशी

मचलने लगे कई ख़्वाब नैनों में मेरे

हूँ धरती पर मै
चाँद आसमाँ पर
लेती अंगड़ाईयाँ
लहराती  चांदनी
झूम रही नाच रही
सागर की मचलती
लहरों पर
अमृत रस बरसा रही
शीतल चाँदनी  गगन से
ठंडी हवा के झोंकों से
सिहरने लगा
नाचने लगा आज
तन मन यहाँ पर
लेने लगी अंगड़ाइयाँ
मन में मेरे
मचलने लगे कई ख़्वाब
नैनों में मेरे
लहरों के संग संग

रेखा जोशी

Monday, 14 November 2016

सिलसिला प्यार का न टूटे अब

याद तेरी  सता रही है मुझे 
ज़िन्दगी अब बुला रही है मुझे 

चोट खाते  रहे  यहाँ साजन 
पीड़  दिल की जला  रही है मुझे 

छिप गये हो कहाँ जहाँ में तुम 
याद फिर आज आ रही है मुझे 
.. 
सिलसिला प्यार का न टूटे अब 
मौत जीना सिखा  रही है मुझे 
... 
आ मिला कर चलें कदम हम तुम 
चाह तेरी  लुभा रही है मुझे 

रेखा जोशी 

Monday, 7 November 2016

हाइकु [प्रदूषण ]


प्रदूषण ये
लेगा जान सबकी
रूकती सांसे
....
जलते नैन
अखियों  में लालिमा
आये न चैन
.....
आतिशबाज़ी
ज़हरीली हवायें
है धुंध छाई

रेखा जोशी


Friday, 4 November 2016

हाइकु

हाइकु

सूरज छष्ठी
है छठ महापर्व
मइया छठी
....
पूजा करती
सूरज आराधना
खुशिया आती
....
है भाई दूज
सजे माथे तिलक
रिश्ता विशेष
..
रेखा जोशी


यूँ तो नही किया है इन्कार ज़िन्दगी से

यूँ तो नही किया है इन्कार ज़िन्दगी से
हमने किया सजन अब इकरार ज़िन्दगी से
शिकवा नही शिकायत भी तो नही हमें अब
तुम जो मिले मिला हम को प्यार ज़िन्दगी से
रेखा जोशी

हद से ज्यादा सुन्दर उसने बनाई यह दुनिया

हद से ज्यादा सुन्दर उसने बनाई यह दुनिया
विभिन्न रंगों से फिर उसने सजाई यह दुनिया
भरे क्यों फिर उसमें उसने ख़ुशी और गम के रँग
हर किसी को उसकी नज़र से दिखाई यह दुनिया
रेखा जोशी

Wednesday, 2 November 2016

दिलों में खुशियों की कलियाँ खिलाता हूँ

छुपा  के   गम अपने  हँसता  हँसाता  हूँ
दर्द   के   मारों   को   अपना   बनाता  हूँ
नाम   मेरा   जोकर   करता    बाज़ीगरी
दिलों में खुशियों की कलियाँ खिलाता हूँ

रेखा जोशी 

Tuesday, 1 November 2016

स्वर गीत तेरे और संगीत हूँ मै

मीत  हो साजन  तेरी  मनमीत हूँ मै
धड़कन   में  समाई   तेरी  प्रीत हूँ मै
गुनगुनाती ज़िन्दगी सँग साजन तेरे
स्वर   गीत  तेरे  और  संगीत   हूँ  मै

रेखा जोशी 

खिला उपवन बहारे मुस्कुराई अब

छंद सिन्धु – (21 मात्रा )

मापनी – १२२२ १२२२ १२२२

नहीं  चाहा कभी  तुम  दूर  हों  हमसे
बहाना  कर सजन  क्यों  रूठ  जाना है  
.... 
खिली है धूप आंगन में हमारे अब 
सुमन उपवन यहाँ पर अब खिलाना है 
.... 
चलो साजन चलें उस पार हम दोनों 
सजन  दिल  आज दीवाना  हमारा है 
... 
मिली है ज़िन्दगी अब मुस्कुराओ तुम 
हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है 
....
खिला उपवन बहारे मुस्कुराई  अब 
ख़ुशी में गीत साजन गुनगुनाना है 

रेखा जोशी 



Monday, 31 October 2016

एक पैग़ाम वीर जवानों के नाम

एक पैग़ाम वीर जवानों के नाम 
उरी में आतंकी हमले के बाद भारत के देशवासियों का खून खौल उठा था ,सोये हुए सैनिको को दरिंदों ने मार  दिया ,उन शहीदों की शहादत पर भारत की ओर  से सर्जिकल स्ट्राइक ने भारतवासियों का ही नहीं ,पूरे सैन्य बल का मनोबल  बढ़ाया।
 देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात सिपाहियों की वीरता पर आज हम सब देशवासियों को गर्व है ,हम सब सुरक्षित हैं तो उन वीर जवानों के कारण ,यह पैगाम है उन वीरों के नाम  जो अपने घरों से दूर हम सब की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है ,''हम जानते है ,हर एक सिपाही अपनी मातृ भूमि पर मिटने के लिए सौ दुश्मन सिपाहियों के बराबर है ,उनके देश भक्ति के इस जज़्बे को हम सब सलाम करते है । 
यह हम सबके लिए बहुत शर्म की बात हैकि विभिन्न राजनीतिक पार्टियां इस पर राजनीति कर रहीं है ।यह वक्त है कि हम सब एकजुट हो कर अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाएं ताकि वह वीरता और बहादुरी से दुश्मन के छक्के छुड़ा कर  देश की सुरक्षा के लिए जी जान की बाजी लगा सकें ।

भारत माता की जय ,जय हिन्द 

रेखा जोशी 

आई उषा रूप पाया निराला

ये  रात काली  घना  है अँधेरा 
आया  ख़ुशी साथ लाया सवेरा 
आई  उषा  रूप  पाया  निराला 
है  भोर  ये  संग  लाई उजाला

रेखा जोशी 

नमन कर शहीदों के नाम इक दीप जलायें

आओ   हम सब ऐसी दिवाली आज मनायें
याद  करें  सीमा  पर जिन्होंने प्राण गवायें
मर मिटे सिपाही जो अपने देश की खातिर
नमन  कर शहीदों के नाम इक दीप जलायें

रेखा जोशी 

प्रेम के दीपक के जलने से उजियारे हुए

जीवन में जब  भी कभी  अपने न हमारे हुए
टूट  जाता  दिल  फिर  तो  दर्द ही सहारे हुए  
रूकती नही कभी भी ज़िंदगी किसी के बिना
प्रेम  के  दीपक  के  जलने  से  उजियारे हुए
 
रेखा जोशी 

Thursday, 27 October 2016

सजन इज़हार पढ़ लेना

छंद- विजात
समान्त – आर
पदांत – पढ़ लेना
1222  1222

सजन इकरार कर लेना
हमारा प्यार पढ़ लेना
,,
खिला उपवन रँगी मौसम
सजन इज़हार पढ़ लेना
,,
निगाहों में समाये तुम
हमें दिलदार पढ़ लेना
,,
बहारें राह में आई
नज़ारे यार पढ़ लेना

पुकारते सजन तुम को 
जिगर के पार पढ़ लेना

रेखा जोशी

Wednesday, 26 October 2016

माटी के खूबसूरत दीये

जगमगायें गे
माटी के खूबसूरत दीये
दीपावली की रात
और
जगमगाये गा
पूरा हिदुस्तान
दीपावली की रात

अब के बरस
सजाये गी लक्ष्मी माँ
घर गरीब का
पूरे होंगे अरमान
हमारी लाडली के
देगी दुश्मन को मात
सोंधी माटी देश की
जगमगाये गा
पूरा हिदुस्तान
दीपावली की रात
….
लेते प्रण आज
हम सब भारतवासी
रौशन करेंगे अपना घर
और
जगमगायें गे
माटी के खूबसूरत दीये
दीपावली की रात
और
जगमगाये गा
पूरा हिदुस्तान
दीपावली की रात

रेखा जोशी

दूरियाँ नज़दीक लाये रेलगाड़ी

छुक छुक छुक चलती जाये रेलगाड़ी
दूरियाँ     नज़दीक    लाये    रेलगाड़ी
आये  जायें  भीड़ भड़कम  में फिर भी
सबके    मन   को    हर्षाये   रेलगाड़ी

रेखा जोशी

खिलती धूप सी तुम्हारी मुस्कुराहट

जलने   से  दीपक  रौशनी  हो  जैसे
रात  में   बिखरती  चांदनी  हो  जैसे
खिलती धूप सी तुम्हारी मुस्कुराहट
शीतल  पवन  सी  सुहावनी हो जैसे
रेखा जोशी


Tuesday, 25 October 2016

खिली है धूप आंगन में हमारे अब

सजन मिल आशियाना अब बसाना है
हमें   तो  प्यार  तुमसे  ही  निभाना है 
खिली  है  धूप  आंगन  में  हमारे अब 
मिली है ज़िन्दगी तो  मुस्कुरायें  अब 

रेखा जोशी 

अँधेरा / उजाला

अँधेरा 

काली रात थी सभी  ओर तम घनेरा 
दिनकर के आगमन से होता  सवेरा 
आओ मिल इक दीप प्रेम का रोशन करें 
प्रेम  से  फैले  उजाला  मिटे  अँधेरा 
.... 
उजाला 

अकेले  मत   बैठो   अँधेरे  में  तुम
खोल कर खिड़की देखो नज़ारे तुम
पट  खुलते  ही फैला  देk
जीवन  में  निहारो अब बहारे तुम

रेखा जोशी 

Monday, 24 October 2016

तमसो मा ज्योतिर्गमय [पूर्व प्रकाशित रचना ]

तमसो मा ज्योतिर्गमय

मेरे पड़ोस में एक बहुत ही बुज़ुर्ग महिला रहती है ,उम्र लगभग अस्सी वर्ष होगी ,बहुत ही सुलझी हुई ,मैने न तो आज तक उन्हें किसी से लड़ते झगड़ते देखा  और न ही कभी किसी की चुगली या बुराई करते हुए सुना है ,हां उन्हें अक्सर पुस्तकों में खोये हुए अवश्य देखा है| गर्मियों के लम्बे दिनों की शुरुआत हो चुकी थी ,चिलचिलाती धूप में घर से बाहर निकलना मुश्किल सा हो गया था ,लेकिन एक दिन,भरी दोपहर के समय मै उनके घर गई और उनके यहाँ मैने एक छोटा सा  सुसज्जित  पुस्तकालय देखा,जिसमे करीने से रखी हुई अनेक पुस्तकें थी   |उस अमूल्य निधि को देखते ही मेरे तन मन में प्रसन्नता की एक लहर दौड़ने लगी ,''आंटी आपके पास तो बहुत सी पुस्तके है ,क्या आपने यह सारी पढ़ रखी है,''मेरे  पूछने पर उन्होंने कहा,''नही बेटा ,मुझे पढने का शौंक है ,जहां से भी मुझे कोई अच्छी पुस्तक मिलती है मै खरीद लेती हूँ और जब भी मुझे समय मिलता है ,मै उसे पढ़ लेती हूँ ,पुस्तके पढने की तो कोई उम्र नही होती न ,दिल भी लगा रहता है और कुछ न कुछ नया सीखने को भी मिलता  है ,हम बाते कर ही रहे थे कि उनकी  बीस वर्षीय पोती हाथ में मुंशी प्रेमचन्द का उपन्यास' सेवा सदन' लिए हमारे बीच आ खड़ी हुई ,दादी क्या आपने यह पढ़ा है ?आपसी रिश्तों में उलझती भावनाओं को कितने अच्छे से लिखा है मुंशी जी ने |आंटी जी और उनकी पोती में पुस्तकों को पढ़ने के इस जज़्बात को देख बहुत अच्छा लगा  |

मुझे महात्मा गांधी की  लिखी पंक्तियाँ याद आ गयी ,'' अच्छी पुस्तके मन के लिए साबुन का काम करती है ,''हमारा आचरण तो शुद्ध होता ही है ,हमारे चरित्र का भी निर्माण होने लगता है ,कोरा उपदेश या प्रवचन किसी को इतना प्रभावित नही कर पाते जितना अध्ययन या मनन करने से हम प्रभावित होते है | अच्छी पुस्तकों के पास होने से हमें अपने प्रिय मित्रों के साथ न रहने की कमी नही खटकती |जितना हम अध्ययन करते है ,उतनी ही अधिक हमें उसकी विशेषताओं के बारे जानकारी मिलती है | हमारे ज्ञानवर्धन के साथ साथ अध्ययन से हमारा  मनोरंजन भी होता है |हमारे चहुंमुखी विकास और मानसिक क्षितिज के विस्तार के लिए अच्छी  पुस्तकों ,समाचार पत्र आदि का बहुत महत्वपूर्ण  योगदान है |ज्ञान की देवी सरस्वती की सच्ची आराधना ,उपासना ही हमे अज्ञान से ज्ञान की ओर ले कर जाती है |हमारी भारतीय संस्कृति के मूल धरोहर , एक उपनिषिद से लिए गए  मंत्र  ,''तमसो मा ज्योतिर्गमय   '',अर्थात हे प्रभु हमे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो  | इस समय मै अपनी पड़ोसन आंटी जी के घर के प्रकाश पुँज रूपी पुस्तकालय में खड़ी पुस्तको की उस अमूल्य निधि में से पुस्तक रूपी अनमोल रत्न की  खोज में लगी हुई थी ताकि गर्मियों की लम्बी दोपहर में मै  भी अपने घर पर बैठ कर आराम से उस अनमोल रत्न के प्रकाश से  अपनी बुद्धि को प्रकाशित कर सकूं |

रेखा जोशी

Sunday, 23 October 2016

सोच विचार कर करते अपना काज

कर्म   करने   का  है  अपना  अंदाज़
सोच विचार कर करते अपना  काज
चिंतन  मनन  करने  से ज़िन्दगी में
है   महकते जीवन के हर पल आज

रेखा जोशी 

Saturday, 22 October 2016

हर घड़ी खुशियाँ मनाना सीख लो

2122  2122  212

ज़िन्दगी में मुस्कुराना सीख लो
गिर गये उनको उठाना सीख लो

.....
दर्द से यह जिन्दगी माना भरी 
प्रेम का दीपक जलाना सीख लो
...
जी लिये गम से भरी यह ज़िन्दगी 
गीत अब तुम गुनगुनाना सीख लो
...
अब किसी की ज़िन्दगी महका यहाँ 
फूल गुलशन में खिलाना सीख लो 
.... 
हो चुकी  यह  ज़िन्दगी बर्बाद  अब 
हर घड़ी खुशियाँ मनाना सीख लो 

रेखा जोशी 


साथी गये हमारे दूर ,हमें गये साजन अब भूल

मेरे  पिया गये परदेस,  बीच रास्ते में हमें छोड़
देकर गये जिया में पीर  ,सजन दिल को हमारे  तोड़
.....
साथी गये हमारे दूर ,हमें गये साजन अब भूल
लिये सुगन्ध प्रेम की संग ,पथ में रहे  शूल ही शूल

रेखा जोशी 

Thursday, 20 October 2016

बीत गई सुबह ज़िन्दगी की ,सन्ध्या को ढलना होगा


अब हमें अपनी चाहतों का ,दमन यहाँ करना होगा 
अब तोड़ कर सब बंधन यहाँ ,तन्हा ही चलना होगा 
.... 
मिले हमें जीवन के पथ पर, साथी भी चलते चलते 
है गये  छोड़ बीच राह में  ,जाने कब  मिलना होगा 
.... 
आई खुशियाँ हमारी गली ,हम थे कभी  मुस्कुराये  
ऐसी लगी हमें नज़र सजन ,जीवन भर जलना होगा 
..... 
टूट  गई माला प्यार भरी  ,छूटे  सभी   रिश्ते  नाते
पिरो के धागों में इन्हें फिर , फूलों को खिलना होगा 
,,,,
जी लिये हम बहुत दुनिया में ,छोड़ दो आस भी हमने 
बीत गई सुबह ज़िन्दगी की ,सन्ध्या को ढलना होगा 

रेखा जोशी 

कैसे कहें तुमसे हम अपने दिल के जज़्बात

है   कोई  नहीं   यहाँ  हमारा   इस  ज़माने  में 
है   करने  लगे  प्यार हम  तुमसे  अनजाने  में 
कैसे  कहें  तुमसे  हम  अपने  दिल के जज़्बात 
बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में

रेखा जोशी 

Wednesday, 19 October 2016

मित्रों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें

सभी मित्रों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें

जीवन की राहों में ले हाथों में हाथ
साजन अब हम चल रहे दोनों साथ साथ

अधूरे  है हम  तुम बिन सुन साथी  मेरे
आओ जियें जीवन का हर पल साथ साथ

हर्षित हुआ  मन देख  मुस्कुराहट तेरी
खिलखिलाते रहें दोनों सदा  साथ साथ

आये कोई मुश्किल कभी जीवन पथ पर
सुलझा लेंगे  मिल कर दोनों साथ साथ

तुमसे बंधी हूँ मै  साथी यह मान ले
निभायें गे इस बंधन की हम साथ साथ

छोड़ न जाना तुम कभी राह में अकेले
अब जियेंगे और मरेंगे हम साथ साथ

रेखा जोशी

Monday, 17 October 2016

मै तो बस अपना हक़ मांग रही हूँ

पूर्व प्रकाशित रचना 

यूँही सदियों से
चल रही पीछे पीछे
बन परछाई तेरी
अर्धांगिनी हूँ मै तुम्हारी
पर क्या
समझा है तुमने
बन पाई मै कभी
आधा हिस्सा तुम्हारा
बहुत सहन कर चुकी
अब मत बांधो मुझे
मत करो मजबूर
इतना कि तोड़ दूँ
सब बंधन
मत कहना फिर तुम
विद्रोही हूँ मै
नही समझे तुम
मै तो बस अपना
हक़ मांग रही हूँ
तुम्हारी
अर्धांगिनी होने का
रेखा जोशी

वैज्ञानिक युग में वास्तु का महत्व

वैज्ञानिक युग में वास्तु का  महत्व

अपना घर ,हमारा अपना प्यारा घरौंदा ,वह स्थान जो सिर्फ हमारा अपना है ,जहाँ हम आज़ाद है कुछ भी करने के लिए ,यह वह स्थान है ,जो दर्शाता है हमारे रहन सहन को ,हमारे चरित्र को,जहाँ हम अपनी सारी  इच्छाएं पूरी करना चाहते है |  हमारा अपना घर ही एक  ऐसी जगह है जहाँ हम सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ चाहते है ,शांति चाहते है जहाँ परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के साथ प्यार मुहब्बत से रहे  ,और चाहते है कि घर का हर सदस्य ख़ुशी ,शांति अनुभव करते हुए जिंदगी में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते  जायें  ।
अगर देखा जाये तो व्यवहारिक जिंदगी में ऐसा होता नहीं है ,लोग अपने ही घरों में उदास, परेशान और दुखी रह कर जीवन व्यतीत करते रहते है । कई बार तो लोगों को मुसीबत चारों ओर से घेर लेती है ,उन्हें  तन, मन से पीड़ित होने के साथ साथ आर्थिक कष्टों से भी गुजरना पड़ता है । यह सब देखते हुए अकसर,मन में यह विचार आता है कि कहीं यह भूमि दोष तो नहीं या उस ईमारत में  ही कोई दोष तो नहीं। वास्तु , सदियों पुराना विज्ञानं क्या इन सबका समाधान दे सकता है। क्या आज के वैज्ञानिक युग में ,वास्तु विज्ञानं की कसौटी पर खरा उतर सकता है ?ऐसे अनेक  सवाल है ,जो तर्क की कसौटी पर सही नहीं उतर पा रहे ।  क्या इस वैज्ञानिक युग में वास्तु का कोई महत्व है ?
ऐसे कई क्षेत्र है जहाँ सदियों पुराना विज्ञानं ,आधुनिक विज्ञानं के साथ आश्चर्यजनक्  रूप से एकरस हो रहा है ,रंगों की दुनिया की ही बात करें तो इस में कोई दो राय नहीं ,कि रंगों का हमारे दिलोदिमाग पर आश्चर्यजनक रूप से असर पड़ता है ।  लाल रंग को ही लें ,जो की ऊर्जा का प्रतीक है ,वास्तुशास्त्र के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा रसोईघर के लिए निर्धारित की गई है जिसे अग्निकोण भी कहा जाता है । इसी तरह हरे रंग के लिए पूर्व दिशा निर्धरित  की गई है ,हरा रंग विकास का प्रतीक है इसलिए इस दिशा में बच्चों का कमरा निर्धारित किया गया है ,वह इसलिए क्यों कि बच्चों के शारीरिक ,बौद्धिक व् मानसिक विकास पर इस रंग का और इस दिशा का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।
पदार्थ विज्ञानं के अनुसार पूरी सृष्टि पञ्च तत्वों से बनी है ,अग्नि ,वायु जल, धरती और आकाश,हर तत्व का अपना एक रंग होता है ,अगर किसी इमारत सही दिशा में में पञ्च तत्वों के अनुसार रंगों का सही दिशा में चुनाव किया जाये तो उसमें रहने वाले सभी लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े गा।  विज्ञानं के अनुसार हम जानते है की हर रंग कि अपनी ही उर्जा होती है,अगर किसी स्थान पर रंगों को सही दिशा में नहीं रखा जाता तो रंगों से निकलने वाली तरंगे आपस में उलझ कर रह जाती है जिसके कारण वह उर्जा सहायक न हो कर विपरीत प्रभाव दे सकती है ,इसलिए विभिन्न रंगों को अगर हम पञ्च तत्वों के अनुसार किसी भी इमारत  में करवायें  तो उस जगह पर ख़ुशी ,शांति और सम्पनता का वास रहेगा चाहे वह घर हो ,व्यवसायक  या उद्योग क्षेत्र हो ।

रेखा जोशी      

Sunday, 16 October 2016

है बहाया है खून वीरों ने हम सब करें उनको प्रणाम

आतँकवाद दुश्मन हमारा कर दें उसका काम तमाम
है  बहाया है खून वीरों ने हम सब करें उनको प्रणाम
बहुत  खेली  खून  की होली अब पाठ पढाना है उन्हें
जो  साथ  दे रहे  है  उनका   देते  उनको यह पैगाम

रेखा जोशी 







छल कपट हमसे क्यों किया तुमने

माना   अपना  तुम्हे   पिया  हमने
छल कपट हमसे क्यों किया तुमने
तोड़ा   दिल  और चल  दिये जनाब
धोखा   हमको   यहाँ   दिया  सबने

रेखा जोशी

Saturday, 15 October 2016

ज़िन्दगी से मिले बहुत धोखे

तुम हमें छोड़ कर गये घर से 
कोई  शिकवा नहीं मुक़द्दर से 
... 
खूबसूरत समा हसीं राहें 
प्यार हमको मिला न सफर से 
... 
टूट कर चूर हो गया यह दिल
कर दिया खून सख्त खंजर से
... 
वक्त ने है किया सितम हम पर 
छोड़ कर तुम कहाँ गये दर  से 
.... 
ज़िन्दगी से मिले  बहुत धोखे
सह लिया आज दर्द अन्दर से

रेखा जोशी